
झारखंड के विभिन्न हिस्सों में नौवीं से अठारहवीं शताब्दी ईस्वी तक की प्रस्तर निर्मित गणेश प्रतिमाएं प…

विदेशी धरती पर तिरंगे में लिपटी सलोनी की आंखों में नमी और मन में गर्व है। कभी बांस की स्टिक और कपड़े…

करीब 50 साल पहले रांची के एक दवा दुकानदार कन्हैया लाल प्रसाद ने बिना किसी पहचान और लिखित भरोसे के एक…

अपने इतिहास लेखन की शैली में सब्यसाची भट्टाचार्य स्वयं शायद गोपाल के अधिक निकट थे। पेशेवर इतिहासकार…

झारखंड में वैष्णव परंपरा के विकास के प्रमाण प्राचीन विष्णु प्रतिमाओं, जगन्नाथ और कृष्ण मंदिरों तथा ट…

रांची के बोड़ेया स्थित मदन मोहन मंदिर का निर्माण 1665 ईस्वी में शुरू हुआ था। ग्रेनाइट पत्थरों से बने…

जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व नहीं, बल्कि जीवन और कर्मों को ईश्वर को समर्पित…

झारखंड के पुरातात्विक इतिहास में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज हुई है। 22 साल के प्रयास के बाद खीरी मठ बौद…

कहानियां उन्होंने बहुत कम लिखीं, लेकिन बहुत वर्ष पहले उनकी एक कहानी ‘कादंबिनी’ में छपी थी, जो एक बड़…

कोलकाता से आईं प्रतिभाशाली युवा गायिका सुदृशा सेनगुप्ता ने मंच संभाला। उन्होंने राग 'मियां की मल्हार…

इस विशाल गिरजाघर की स्थापना का श्रेय फादर गोस्सनर को जाता है। इसके निर्माण में फादर गोस्सनर ने तब अप…

शोध का उद्देश्य झारखंड की समृद्ध लोकनाट्य एवं प्रदर्शन परंपराओं को अकादमिक दृष्टि से समझना और उनके व…