
संथाल समाज के पवित्र धर्मस्थल लुगुबुरू घंटाबाड़ी धोरोमगढ़ से जुड़ी सदियों पुरानी मौखिक परंपराओं पर 3…

1857 की क्रांति के दौरान पलामू में नीलांबर-पीतांबर के नेतृत्व में जनजातीय विद्रोह ने अंग्रेजी सत्ता…

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 6 सितंबर को कुड़मी समाज ने ‘ब्लैक डे’ के रूप में धरना-प्रदर्शन किया। अमित महत…

झारखंड का डोकरा शिल्प केवल पारंपरिक आभूषण बनाने की कला नहीं, बल्कि संताल समाज की सांस्कृतिक पहचान और…

हाल के वर्षों में भविष्य के वैश्विक पर्यावरण की स्थिति मनुष्य के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वर्तम…

आदिवासी समाज में मांदर, तमाक, ढमसा, बांसुरी, रणसिंघा, सकुआ, आकाम, मदनभेड़ जैसे वायु-आधारित वाद्य तथा…

जादोपटिया चित्रकार लंबे पट्ट पर क्रमवार चित्र बनाते थे। चित्रों को एक-एक कर खोलते हुए वे उनसे जुड़ी…

संप्रति संथालों के बीच एक सुधारवादी संप्रदाय है, जो आरंभ से ही संथाल-समाज के दुर्गुणों को दूर करने क…

झारखंड के छऊ नृत्यों की चार शैलियों में से सिंगुआ शैली लगभग मृतप्रायः हो चुकी थी। एक दिन अपनी खास शै…

महिलाएं और पुरुष इसे अपनी-अपनी पारंपरिक शैली में पहनते रहे हैं। महिलाओं के पांची सेट में निचले हिस्स…

चयनित पांडुलिपियों को पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाता है और प्रत्येक विजेता लेखक को प्रकाशित पु…

मुकुंद नायक कहते हैं, 1988 में विदेश जाने का पहला मौका मिला। हांगकांग में लोक संगीत पर कार्यशाला थी।…