नई दिल्ली : इंटैक (INTACH) द्वारा नई दिल्ली में आयोजित "अर्घ्य" प्रदर्शनी का शुभारंभ करते हुए राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि छठ हमारी महत्वपूर्ण अमूर्त सांस्कृतिक विरासत है और अब उसका वैश्विक प्रसार हो चुका है। उन्होंने छठ के साथ अपनी व्यक्तिगत यादों को ताजा करते हुए कहा कि बचपन में उन्होंने छठ के लिए भिक्षाटन किया है। छठ महापर्व में भारत की सांस्कृतिक और सनातन परम्परा की स्पष्टत परिलक्षित होती है। इंटैक के इस प्रयास की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि अर्घ्य प्रदर्शनी से प्रधानमंत्री द्वारा यूनेस्को की ICH की सूची में छठ को स्थान दिलाने में समर्थन मिलेगा।
इंटैक के अध्यक्ष अशोक सिंह ठाकुर ने स्वागत संबोधन में कहा कि 1984 ई. में स्थापित इंटैक का मुख्य उद्देश्य भारत के मूर्त एवं अमूर्त विरासतों का संरक्षण है। धन्यवाद ज्ञापन इंटैक के सदस्य सचिव रविंद्र सिंह ने किया। इंटैक बिहार चैप्टर के कन्वेनर भैरव लाल दास ने कहा कि छठ को आधार बनाकर लगाई गई यह पहली प्रदर्शनी है जिसमें बिहार की सभी कला विधा यथा कंटेंपरेरी, पटना कलम, मधुबनी पेंटिंग्स, मंजूषा, टिकुली, भोजपुरी, सुजनी, क्रोशिया, टेराकोटा, वैद्यनाथ पेंटिंग्स को स्थान दिया गया है।
प्रसिद्ध लोक गायिका कल्पना पटवारी ने छठ गीतों को गाते हुए प्रदर्शनी देखी एवं गीतकार हृदय नारायण झा के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। प्रदर्शनी की क्यूरेटर मनीषा झा एवं अलका दास ने कहा कि 53 कलाकारों के समूह द्वारा लगभग 78 कलाकृतियों का इसमें प्रदर्शन हुआ है। इंटैक की बिंदु मनचंदा ने कहा कि इस प्रदर्शनी को देखने दिल्ली के कला मर्मज्ञों में अति उत्साह से आयोजकों को प्रसन्नता हुई है। यह प्रदर्शनी 1 अक्टूबर तक चलेगा।

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