सारिका भूषण जी कई विधाओं में लिखती हैं। रांची में रहती हैं। इन दिनों बेटे के पास इंग्लैंड के एक प्रमुख शहर ब्रिस्टल में हैं। वहां से उन्होंने बाथ शहर के बारे में कई रोचक जानकारियां साझा की हैं। चौराहा पर पहली बार पढ़िए उनका यह यात्रावृत्तांत।
इंग्लैंड अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, आधुनिक संस्कृति और वैश्विक प्रभाव के लिए जाना जाता है। बाथ (Bath) ऐतिहासिक धरोहरों से समृद्ध दक्षिण-पश्चिमी इंग्लैंड का एक ख़ूबसूरत और अनुशासित शहर है, जहां की सड़कों पर टहलते हुए आप वहां की कलाओं और कलाकृतियों को बहुत करीब से देख और समझ सकते हैं।
यह शहर इंग्लैंड के समरसेट काउंटी में एवन नदी के किनारे बसा हुआ है। यह इंग्लैंड की राजधानी लंदन से लगभग 97 मील (156 किमी) पश्चिम और ब्रिस्टल से 11 मील (18 किमी) दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यहां के लोगों को चाय पीना बहुत पसंद है मगर नई पीढ़ी का झुकाव कॉफ़ी की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा 'फिश एंड चिप्स' यहां का पारंपरिक भोजन है।

इन दिनों मैं बेटा के पास इंग्लैंड के एक प्रमुख शहर ब्रिस्टल में हूं। आज हम ब्रिस्टल से एक घंटा की बस यात्रा करके बाथ पहुंचे। डबल डेकर बस में बैठकर सफ़र करने का मेरा यह पहला अनुभव था। मैं बस में बैठकर ऊपर से खूबसूरत रास्तों का वीडियो बना रही थी तब बेटे में मुझे मोबाइल की बैटरी और मेमोरी बचाने की सलाह दी। मुझे भी यही सही लगा क्योंकि आज हमारे पूरे दिन का भ्रमण था।
अगस्त महीने में अन्य दिनों की अपेक्षा आज मौसम बहुत सुहाना था। धूप तीखी नहीं थी और मीठी हवाओं के साथ बाथ की सड़कों पर टहलकर घूमने का आनंद ही कुछ और था। रविवार का दिन था इसीलिए शहर पर्यटकों से भरा था। जगह-जगह पर पार्क में और प्रमुख दर्शनीय स्थलों के पास कुछ स्थानीय कलाकार अपने-अपने वाद्य यंत्रों के साथ दिख रहे थे। यहां बजते मधुर संगीत का हमने भी आनंद उठाया। मन तो करता था कि कुछ घंटे वहीं बैठकर बस इस संगीत में खो जाऊं परंतु ऐसे में पूरा शहर घूमना भला कैसे हो पाता।

हम इस ख़ूबसूरत शहर की गलियों में घूमते-घूमते कई ऐतिहासिक इमारतों और कलाओं को देखते हुए जा रहे थे। यहां छोटे-छोटे बच्चों का उत्साह सचमुच माहौल को ख़ुशनुमा बना रहा था। आसपास के कॉफी शॉप से आती भीनी-भीनी खुशबू, रेस्तरां के सामने करीने से सजे मेज़-कुर्सियां और उनकी सजावट किसी भी राहगीर को अपनी ओर खींचने के लिए काफी थी। हमने भी आइस्ड लाटे कॉफ़ी, पेस्ट्री और कुछ स्नैक्स लिया।

बाथ शहर में स्थित द सर्कस (The Circus, Bath) जॉर्जियाई वास्तुकला (Georgian architecture) का एक ऐतिहासिक और शानदार गोलाकार आवासीय परिसर है। इसे वास्तुकार जॉन वुड सीनियर (John Wood the Elder) ने डिज़ाइन किया था और इसका निर्माण 1754 से 1768 के बीच किया गया था। यह तीन घुमावदार खंडों से मिलकर बना एक बड़ा वृत्त है, जिसके केंद्र में एक खुला मैदान और पेड़ हैं। इसी मैदान के बीच हमने बैठकर अपनी काफी और स्नैक्स का लुत्फ उठाया और कुछ समय बिताया। इसे मूल रूप से "किंग्स सर्कस" (King's Circus) कहा जाता था। इसकी प्रेरणा रोम के कोलोसियम (Colosseum) से ली गई है, लेकिन इसकी खासियत यह है कि कोलोसियम बाहर से दिखता है और सर्कस अंदर से दिखता है।
बाथ शहर में स्थित ग्रेट बाथ (Great Bath) बड़े और खुले हिस्से में बना मुख्य विशाल कुंड, जो प्राचीन इंजीनियरिंग और सीसे की परतों से सुसज्जित है। यहां स्थित सुलिस मिनर्वा का मंदिर (Temple of Sulis Minerva) आरोग्य की देवी सुलिस मिनर्वा को समर्पित है और जो अब प्राचीन मंदिर के अवशेष भर हैं।
इस शहर में रोमन काल की कलाकृतियों, सिक्कों और इतिहास को प्रदर्शित करने वाला एक समृद्ध संग्रहालय भी है। अपनी खूबसूरत गाथिक वास्तुकला के लिए जानी जाने वाली ऐतिहासिक चर्च बाथ एबे (Bath Abbey) और लेखिका जेन आस्टिन की यादों और उनके इतिहास को समेटे हुए जेन ऑस्टिन सेंटर इस शहर के प्रमुख आकर्षण हैं। प्रसिद्ध लेखिका जेन ऑस्टेन कुछ समय तक इसी शहर में रहीं थीं, और उनकी याद में यह सेंटर बनाया गया है।
जब हमारे जैसे लेखक प्रजाति के लोग किसी नये स्थान पर घूमने जाते हैं तब नज़रें किसी पुस्तकालय या बुक स्टोर को जरूर ढूंढती है। आज भी थोड़ा वक्त पुस्तकों के साथ एक बड़े से समृद्ध बुक स्टोर में गुजारना मेरे लिए बहुत उत्साहित करने वाला था। खासकर जब पता हो कि यह शहर जेन ऑस्टिन जैसी लेखिका से संबंधित हो। मेरा मानना है पुस्तकें आपको दुनिया दिखाने के साथ-साथ उस शहर की संपन्नता और जागरूकता को भी दर्शाती हैं। काश! ऐसे पुस्तकालय हमारे देश के छोटे-बड़े शहरों में भी रहे। समाज की मानसिकता और व्यवहार दोनों सकारात्मक दिशा में बढ़ते हैं। पुस्तकालय में पुस्तकों के बीच जाकर यह अहसास होता है कि हमें अभी कितना पढ़ना बचा हुआ है और ज्ञान के इस सागर में अपना अस्तित्व एक सीप भर है। ज्ञान पाने की पिपासा जब तक बनी रहेगी तब तक हम अपने को समृद्ध करते रहेंगे वरना अहंकार की बेड़ियों से बंधते देर नहीं लगती।
एक रोचक बात यह है कि इस शहर के सभी घर सुनहरे-पीले रंग के खास 'बाथ स्टोन' से बने हैं, जो धूप में काफी चमकते हैं। इन्हें देखना और इनके साथ समय बिताना सचमुच रोमांचक और बेहद सुकुनभरा था।
कवयित्री एवं लेखिका
रांची, झारखंड

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