रांची/ दिल्लीः दिल्ली के जंतर-मंतर पर कुड़मी समाज की ओर से प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन की अनुमति रद्द किए जाने के बाद रविवार को विवाद की स्थिति बन गई। बृहद झारखंड कुड़मी/कुरमी समन्वय समिति के बैनर तले यह प्रदर्शन होना था। इसमें झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। समिति के अनुसार, दिल्ली प्रशासन ने करीब दो सप्ताह पहले 5 और 6 सितंबर को धरना-प्रदर्शन की अनुमति दी थी। बाद में 4 सितंबर की रात अनुमति रद्द कर दी गई। प्रशासन के इस निर्णय शीतल ओहदार सहित धरना प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे लोगों में आक्रोश उत्पन्न हो गई और हर कीमत पर जंतर मंतर में शामिल होने के लिए जिद में अड़ गए। समिति का दावा है कि रविवार को जब लोग अंबेडकर भवन से जंतर-मंतर जाने के लिए निकले, तब दिल्ली पुलिस ने कुड़मी समाज के अगुआ शीतल ओहदार समेत बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद लोग अंबेडकर भवन परिसर में डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास बैठ गए। कुड़मी समाज की ओर से यह प्रदर्शन समाज को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने और कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर आयोजित किया जाना था।
शीतल ओहदार ने क्या कहा
अंबेडकर भवन परिसर में लोगों को संबोधित करते हुए शीतल ओहदार ने कहा कि कुड़मीयों के साथ विगत 75 साल से अन्याय हो रहा है। उन्होंने कहा कि 6 सितंबर 1950 को कार्पोरेट घरानों के इसारे से हमें जनजातिय अधिकार से वंचित किया गया और पिछड़ी जाति के श्रेणी में रखा गया। ओहदार ने कहा कि झारखंड, बंगाल और ओडिशा से लोग काफी दूर से दिल्ली अपने अधिकार की आवाज उठाने पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद लोगों का दिल्ली पहुंचना समाज की एकजुटता को दिखाता है। उन्होंने 1901, 1911, 1921 और 1931 की जनगणना रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय कुड़मियों को अलग-अलग जनजातीय श्रेणियों में दर्ज किया गया था। उनका आरोप है कि आजादी के बाद कुड़मी समाज को जनजाति की श्रेणी से हटा दिया गया। ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज की जमीन के नीचे खनिज संपदा है और इसी वजह से समाज को उसके अधिकारों से दूर रखा गया। उन्होंने केंद्र सरकार से कुड़मियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
शीतल ओहदार ने कहा कि अगर कुड़मी समाज को जल्द अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो झारखंड में आंदोलन को तेज किया जाएगा। उन्होंने चक्का जाम करने और झारखंड से खनिज अयस्क बाहर नहीं जाने देने की चेतावनी भी दी। उन्होंने कुड़मी समाज के लोगों से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और राजनीतिक स्तर पर भी अपनी मांग के समर्थन में निर्णय लेने की अपील की।
हर साल 6 सितंबर को होता है प्रदर्शन
समिति के अनुसार, कुड़मी समाज की ओर से हर साल 6 सितंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया जाता है। इस बार भी झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा से हजारों लोग दिल्ली पहुंचे थे। प्रदर्शन में महिला और पुरुष पारंपरिक पोशाक में नजर आए। कार्यक्रम में कुड़मी सेना के अध्यक्ष लालटू महतो, सखीचंद महतो, थानेश्वर महतो, कपिल देव महतो, अधिवक्ता मिथिलेश महतो, राजेंद्र महतो, संजय लाल महतो, हेमलाल महतो, नेपाल महतो, जयराम महतो, डबलू महतो, सुषमा महतो, सचिया महतो, रामचंद्र महतो, ललित मोहन महतो, रघुनाथ महतो और अमर महतो समेत कई लोगों ने अपनी बात रखी। कार्यक्रम में नंदलाल महतो, प्रदीप महतो, ओम प्रकाश महतो, अघनू राम महतो, सुधीर मंगलेश, कृति भूषण महतो, कंचन महतो, रविता देवी, अमृता देवी, लालो देवी, रेखा देवी, सरस्वती देवी, बालको देवी और अनिता देवी समेत बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों के शामिल होने की बात कही गई।

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