वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की प्रशासनिक सेवा में वापसी हो गयी है। कानूनी अड़चनों से राहत मिलने के बाद झारखंड सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया है। निलंबन हटने के तुरंत बाद उन्होंने कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग में अपनी आधिकारिक उपस्थिति दर्ज करा दी है। विनय कुमार चौबे लंबे समय से शराब घोटाले और हजारीबाग भूमि विवाद से जुड़े मामलों में कानूनी जांच का सामना कर रहे थे। वह करीब 14 माह जेल में भी रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट से पिछले महीने मिली थी सशर्त जमानत
निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने उन्हें सशर्त जमानत दी थी। कोर्ट ने शर्त रखी थी कि वह बिना अनुमति देश नहीं छोड़ेंगे।
जमानत मिलने और कानूनी प्रक्रियाओं में राहत के बाद अब राज्य सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग में अपनी जिम्मेदारी संभाल ली है।
शराब घोटाले में 2025 में हुई थी गिरफ्तारी
विनय चौबे पिछले काफी समय से कानूनी मामलों का सामना कर रहे थे। शराब घोटाले से जुड़े मामले में एसीबी ने उन्हें साल 2025 में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। इसके अलावा हजारीबाग के भूमि घोटाले से जुड़े मामले में भी उनका नाम सामने आया था। इन मामलों को लेकर वह लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया का सामना करते रहे।
1999 बैच के आईएएस अधिकारी हैं विनय चौबे
विनय कुमार चौबे 1999 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और झारखंड सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। वह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के अलावा जल संसाधन, योजना-सह-वित्त और आबकारी जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।

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