दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गहरा शोक जताया है। मुख्यमंत्री रविवार को गिरिडीह के हरसिंहरायडीह स्थित सुदिव्य कुमार के आवास पहुंचे और उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात की और अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार का अचानक निधन बेहद पीड़ादायक है। उनके निधन से झारखंड ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है। हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार के योगदान और उनकी सेवाओं को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस मुश्किल समय में धैर्य एवं संबल देने की ईश्वर से प्रार्थना की। इस दौरान विधायक कल्पना सोरेन ने भी सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
गिरिडीह से लगातार दूसरी बार चुने गए थे विधायक
सुदिव्य कुमार झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल थे। वह गिरिडीह सदर विधानसभा सीट से 2019 में पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी। विधायक के रूप में गिरिडीह क्षेत्र में उनकी सक्रियता लगातार बनी रही। राजनीति में आने से पहले और संगठन में रहते हुए उन्होंने लंबे समय तक झामुमो के साथ काम किया। करीब तीन दशक तक पार्टी से जुड़े रहने के बाद वह राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहे।
हेमंत सोरेन सरकार में संभाली कई अहम जिम्मेदारियां
विधायक बनने के बाद सुदिव्य कुमार को हेमंत सोरेन सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी मिली। उनके पास उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी रही। इन विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर वह सरकार का पक्ष रखते रहे। उच्च शिक्षा और युवाओं से जुड़े मामलों में भी सुदिव्य कुमार सक्रिय रहे। हाल के दिनों में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं से जुड़े छात्र आंदोलनों के दौरान उन्होंने सरकार और छात्रों के बीच संवाद कायम करने में भूमिका निभाई थी।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में निधन
सुदिव्य कुमार की तबीयत शनिवार देर रात अचानक बिगड़ गई थी। उन्हें सीने में दर्द और बेचैनी की शिकायत के बाद गिरिडीह के निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। अस्पताल से जुड़े डॉक्टरों के अनुसार उन्हें करीब रात 2 बजे के बाद अस्पताल लाया गया था और चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बच सकी। उनके निधन की खबर सामने आते ही गिरिडीह से लेकर पूरे झारखंड में शोक की लहर दौड़ गई। पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और बड़ी संख्या में लोग उनके आवास और अस्पताल पहुंचने लगे

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