रविवार की शाम वर्षा ऋतु के रागों से भीगी। आयोजन भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध और जीवंत परंपरा को अक्षुण्ण रखने के उद्देश्य से 'सुर निषाद' संस्था ने किया था। मेकान कालोनी स्थित जवाहरलाल नेहरू कला केंद्र में यह एक यादगार शाम थी। प्रख्यात सितार वादक एवं संगीत गुरु प्रशांत ठाकुर की पुण्य स्मृति को समर्पित यह शाम वर्षा ऋतु के सुंदर भावों और मल्हार के विविध रंगों से सराबोर रही। यह कार्यक्रम सुर निषाद संस्था की शास्त्रीय संगीत को समर्पित 14वीं बैठक है।
राग 'देश' से हुई मधुर शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ रांची के उभरते युगल गायकों साक्षी गोपाल मिश्र एवं वेणु गोपाल मिश्र की शास्त्रीय प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने हिंदुस्तानी संगीत के अत्यंत सुरीले और भावपूर्ण राग 'देश' का चयन किया। वर्षा की पहली फुहार, मिट्टी की सोंधी महक और मानसून के सुकून को समेटे इस प्रस्तुति ने श्रोताओं को आरंभ में ही मंत्रमुग्ध कर दिया। गायकों को कोलकाता के वरिष्ठ तबला वादक श्री सब्यसाची सेनगुप्ता तथा हारमोनियम पर ध्रुपद गायक श्री नयन मिश्र की उत्कृष्ट संगत मिली।
'मियां की मल्हार' से गहराया मानसून का रंग
अगली कड़ी में कोलकाता से आईं प्रतिभाशाली युवा गायिका सुदृशा सेनगुप्ता ने मंच संभाला। उन्होंने राग 'मियां की मल्हार' की अत्यंत गंभीर और भावपूर्ण प्रस्तुति दी, जिसे वर्षा ऋतु के रागों का सम्राट कहा जाता है। उनके मधुर कंठ और तानों के प्रवाह ने वातावरण में मल्हार का जादू जगा दिया। तबले पर श्री सब्यसाची सेनगुप्ता और हारमोनियम पर श्री नयन मिश्र की सधी हुई संगति ने इस प्रस्तुति को और भी निखार दिया।
राग 'मेघ मल्हार' की मेघगर्जन-सी गूंज
संध्या का मुख्य आकर्षण बोकारो के ख्यातिप्राप्त गायक विभु शंकर मिश्र का गायन रहा। उन्होंने राग 'मेघ मल्हार' के माध्यम से उमड़ते-घुमड़ते बादलों और उनकी गर्जना का सजीव दृश्यांकन प्रस्तुत किया। उनकी बुलंद आवाज और ऋतु-विशेष के इस राग के सूक्ष्म चित्रण ने सभी संगीत-रसिकों को भाव-विभोर कर दिया। इस प्रस्तुति में रांची के राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त तबला वादक सृजित चटर्जी की ताल-संगत और नयन मिश्र के हारमोनियम वादन ने अद्भुत समां बांधा।
दिग्गज कलाकारों और संगीत-रसिकों का जमावड़ा
इस संगीतमय आयोजन में रांची के कला एवं संगीत जगत की अनेक गणमान्य उपस्थित रहीं। इनमें मुख्य रूप से पं. संदीप चटर्जी, पं. शैलेंद्र पाठक, पं. अभिराम पाठक, पं. रंजन प्रसाद मिश्र, डा. सिद्धार्थ सान्याल, चंद्रकांत रायपत, जयति राय चौधरी, डा. मनीष कुमार, रथिन मुखर्जी, स्पर्श उपाध्याय, उत्तम ठाकुर, शंपा चटर्जी एवं गौरी लाहिड़ी शामिल थे। कार्यक्रम के अंत में 'सुर निषाद' के समन्वयक देवप्रिय ठाकुर ने सभी आमंत्रित कलाकारों, अतिथियों एवं श्रोताओं का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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