जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में 10 सितंबर 2026 को ‘प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान समारोह 2025’ का आयोजन किया गया। अनुवाद अध्ययन, भारतीय भाषा केंद्र, भाषा साहित्य एवं संस्कृति अध्ययन संस्थान और प्रकाशन संस्थान, नई दिल्ली के संयुक्त संयोजन में आयोजित इस कार्यक्रम में ‘एशियाई अनुवाद परंपरा’ विषय पर विचार-गोष्ठी भी हुई। इस बार का प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान जेएनयू के चीनी अध्ययन केंद्र में प्रोफेसर बीआर दीपक को दिया गया। बीआर दीपक ने पचास से अधिक पुस्तकों की सर्जना की है, जिसमें मौलिक एवं अनूदित लेखन दोनों शामिल हैं।
JNU में ‘प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान 2025’ का आयोजन
सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि हरिवंश नारायण सिंह, उप-सभापति, राज्यसभा थे। वहीं ‘एशियाई अनुवाद परंपरा’ विषय पर आयोजित विचार-गोष्ठी में वक्तव्य देने के लिए हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका, प्रसिद्ध समीक्षक एवं व्यंग्य लेखक रवींद्र त्रिपाठी और प्रो. देवशंकर नवीन को आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम में जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, कुलसचिव रविकेश एवं भाषा संस्थान की अधिष्ठाता शोभा सिवसंकरन भी मौजूद थीं। कार्यक्रम का आरंभ भारतीय भाषा केंद्र के अध्यक्ष प्रो. सुधीर प्रताप सिंह के स्वागत वक्तव्य से हुआ। इसके बाद सम्मानित अतिथियों का सम्मान किया गया और उन्हें स्मृति चिह्न भेंट किए गए।
‘एशियाई अनुवाद परंपरा’ पर वक्ताओं ने रखे विचार
सर्वप्रथम प्रो. देवशंकर नवीन ने ‘एशियाई अनुवाद परंपरा’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए एक पूर्वपाठिका का निर्माण किया। प्रो. नवीन का मानना है कि विश्व की सबसे प्राचीनतम अनुवाद परंपरा भारतीय अनुवाद परंपरा है और इसके पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। हिंदी की सुप्रसिद्ध कवयित्री अनामिका ने अपने वक्तव्य में कहा कि अनुवादक एक सांस्कृतिक राजदूत होता है और अनुवाद द्वारा ही संसार को जानने-समझने की प्रक्रिया संभव हो पाती है। इसके अतिरिक्त उन्होंने कुमारजीव और दारा शिकोह के द्वारा किए गए सहयोगी अनुवाद (कोलैबोरेटिव ट्रांसलेशन) के महत्व को भी रेखांकित किया। प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान प्राप्तकर्ता बीआर दीपक ने अपने वक्तव्य में एशियाई अनुवाद परंपरा के इतिहास पर संक्षेप में बात रखते हुए कहा, "भारत की ज्ञान परंपरा, शिक्षाशास्त्र, नीतिशास्त्र और दर्शन से जुड़ी बातें अनुवाद के माध्यम से चीन तक पहुंची और संस्कृत के पैंतीस हजार से ज्यादा शब्दों को चीनी भाषा ने आत्मसात कर लिया है।"
प्रो. बीआर दीपक को 51 हजार रुपये की पुरस्कार राशि के साथ सम्मान
इसके उपरांत प्रकाशन संस्थान, जेएनयू कुलगुरु शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित एवं मुख्य अतिथि हरिवंश नारायण सिंह ने मिलकर ‘प्रकाशन संस्थान अनुवाद सम्मान 2025’ के तहत बीआर दीपक को सम्मानित किया। उन्हें पुरस्कार राशि के रूप में 51 हजार रुपये भेंट किए गए।

Comments (0)
Write first comment
Please Login to write comment