रांची/हजारीबाग: योजनाओं का वास्तविक मूल्यांकन कागजों पर नहीं, बल्कि लाभुकों के जीवन में आए बदलाव से होता है। इसी सोच के साथ कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने आज हजारीबाग जिले के नगवा एवं चुरचू गाँव का दौरा कर मत्स्य विभाग की योजनाओं की जमीनी समीक्षा की।
मंत्री ने लाभुकों से सीधा संवाद कर योजनाओं से मिल रहे लाभ, चुनौतियों और आय वृद्धि की संभावनाओं की जानकारी ली। बायोफ्लॉक योजना: युवाओं के लिए स्वरोजगार का नया मॉडल निरीक्षण के दौरान मंत्री ने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सशक्त माध्यम बन रहा है। 25 बायोफ्लॉक टैंक की एक इकाई की लागत लगभग 25 लाख रुपये है, जिस पर सरकार द्वारा 60% तक अनुदान दिया जा रहा है। युवा इस योजना से जुड़कर गांव में ही रोजगार सृजित कर रहे हैं।
हजारीबाग में पर्ल क्लस्टर से किसानों को अतिरिक्त आय
हजारीबाग में विकसित हो रहा पर्ल क्लस्टर झारखंड में मत्स्य विविधीकरण की दिशा में एक बड़ी पहल है। किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ मोती की खेती से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।सरकार द्वारा मोती की खेती के लिए प्रति यूनिट ₹16,000 की सहायता प्रदान की जा रही है।
मंत्री ने कहा, "हजारीबाग में मोती की खेती की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरकार इसे और व्यवस्थित एवं व्यापक रूप देगी। किसानों को बेहतर तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाएगी। हमारा लक्ष्य हजारीबाग को मोती की खेती में झारखंड का आदर्श जिला बनाना है।" उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं की नियमित जमीनी समीक्षा की जाए और लाभुकों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए।

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